मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश दिया है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
क्यों हुआ हमला?
इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है और उत्तरी इजरायल के शहरों पर रॉकेट तथा ड्रोन हमले कर रहा है। इजरायल ने कहा है कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई जरूरी हो गई थी। इसके बाद बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियेह (Dahiyeh) इलाके में हवाई हमले किए गए, जिसे हिजबुल्लाह का प्रमुख गढ़ माना जाता है।
बेरूत में मची अफरा-तफरी
हमलों की खबर के बाद हजारों लोग प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। कई इलाकों में धुएं के बड़े गुबार दिखाई दिए और लोगों में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
लेबनान में जमीनी कार्रवाई भी तेज
हवाई हमलों के साथ-साथ इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपने जमीनी अभियान को भी तेज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार इजरायली बलों ने रणनीतिक महत्व वाले कई क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। इसे पिछले कई दशकों में सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है।
अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
अमेरिका समेत कई देशों ने बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। वॉशिंगटन लगातार संघर्षविराम कराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन ताजा घटनाओं के बाद शांति वार्ता को बड़ा झटका लगा है। कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल संघर्षविराम लागू करने की अपील की है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इजरायली हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरान का कहना है कि लेबनान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय शांति प्रयासों को कमजोर कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व में देखने को मिल सकता है।
क्या Middle East बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव इसी तरह जारी रहा तो यह संघर्ष केवल लेबनान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों की भागीदारी की आशंका के चलते पूरे Middle East में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष
बेरूत पर ताजा हमलों ने एक बार फिर Middle East को अस्थिरता के दौर में धकेल दिया है। लगातार हो रहे हमले, जमीनी सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक तनाव ने क्षेत्र की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या संघर्ष और अधिक गंभीर रूप लेता है।



